खान-पान को लेकर कई तरह के ग्रामीण इलाकों में गर्भावस्था और प्रसव के बाद अंधविश्वास हावी हैं। अक्सर महिलाओं को कटहल या पपीता खाने से यह कहकर रोका जाता है कि इससे गर्भपात हो सकता है। इसी तरह, दूध में घी डालकर देने को लेकर यह भ्रम फैलाया जाता है कि इससे गर्भ में बच्चा घबरा सकता है। एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रिचा सिंह ने बताया कि अंधविश्वास और वैज्ञानिक आधार से परे हैं। इन पुरानी मान्यताओं के चक्कर में गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु को जरूरी विटामिन्स और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर पैदा होता है। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को कच्चा पपीता या अधपके फल खाने से बचना चाहिए। ऐसे फलों से पेट दर्द या उल्टी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान पपीता या कटहल खाने से गर्भपात नहीं होता है, इसलिए महिलाएं इसे बिना किसी डर के आराम से खा सकती हैं। इन फलों को खाने से पाचन (डायजेशन) की थोड़ी-बहुत समस्या जरूर हो सकती है, लेकिन गर्भपात जैसी गंभीर स्थिति पैदा नहीं होती।