मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी सीएम ग्रिड परियोजना के तहत चल रहे कार्यों के बेहतर पर्यवेक्षण के लिए शासन के निर्देश पर नगर निगम ने आउटसोर्स पर तीन जेई-एई की भर्ती की। निगम ने जब उन्हें जोन में अभियंता के रूप में दायित्व सौंपे तो नियमित अभियंताओं ने आपत्ति शुरू कर दी। विवाद के बाद निगम ने शासन से इन अभियंताओं को बिलिंग और कार्य की माप संबंधी शक्ति प्रदान करने को लेकर मार्गदर्शन मांगा है। दरअसल, योजना के तहत चल रहे प्रोजेक्टों की पर्यवेक्षण के लिए शासन ने आउटसोर्स पर सेवानिवृत्त इंजीनियरों की नियुक्ति की मंजूरी दी थी। विभाग ने एक समाचार पत्र में आवेदन निकाला, जिसके बाद उसके पास सिर्फ तीन ही आवेदन पहुंचे। इन तीनों ही लोगों का चयन हो गया। 2 जनवरी को नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने सहायक अभियंता सिविल राजपाल सिंह यादव को छत्ता जोन व जेई सिविल प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को लोहामंडी जोन के सभी निर्माण कार्य और सहायक अभियंता इलेक्ट्रिकल रमेश चंद्र को विद्युत विभाग के सभी कार्य का जिम्मा सौंपा तो नियमित अभियंताओं ने आपत्ति कर दी। इस पर नगर निगम प्रशासन ने मार्गदर्शन मांगने के लिए शासन को पत्र लिख दिया है। कार्यवाहक मुख्य अभियंता सिविल अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि शासन के निर्देश पर हुई नियुक्ति के बाद दायित्वों को लेकर कुछ अस्पष्टता थी। इसी वजह से शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। शासन से जो भी निर्देश आएंगे, उसके अनुसार आगे कार्रवाई की जाएगी।