फतेहपुर सीकरी के ग्राम कराही में आयोजित कबड्डी महोत्सव में शनिवार को शिरकत करने पहुंचीं देश की ख्याति प्राप्त राष्ट्रीय कोच पद्मश्री एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुनील डबास ने खेल और खिलाड़ियों के भविष्य पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय बेटियों में कबड्डी को लेकर जबरदस्त जुनून है और यदि उन्हें सही प्लेटफॉर्म (एक्सपोजर) मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। डॉ. डबास ने ग्रामीण अंचल में होने वाली प्रतियोगिताओं के स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि अभी भी गांवों में कबड्डी मिट्टी पर खेली जा रही है, जबकि नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर खेल मैट पर होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण लीग मैच भी मैट पर आयोजित होने चाहिए। इससे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर के खेल का वास्तविक अनुभव और आभास मिलेग। आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से जुड़कर ही ग्रामीण प्रतिभाएं आगे बढ़ पाएंगी। डॉ. डबास ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कबड्डी भारत का पारंपरिक खेल है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संघों में भारत का प्रतिनिधित्व वैसा नहीं है जैसा होना चाहिए। उन्होंने कहा, हम पिछले 7 सालों से कोर्ट से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में एशिया के जनरल सेक्रेटरी पाकिस्तान से हैं और प्रेसिडेंट ईरान से। जब हम विवादों से बाहर आएंगे, तभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना मजबूत पक्ष रख पाएंगे।