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अक्षय सुहाग के लिए ये हैं ‘सिंदूर तृतीया’ के विधि विधान

वीडियो डेस्क, अमर उजाला टीवी/ नई दिल्ली Updated Thu, 21 Sep 2017 11:20 AM IST

पितृपक्ष और नवरात्र के बीच जो अमावस्या होती है उसे कहा जाता है ‘महालया’ और इसी दिन से दुर्गा पूजा की भी शुरुआत हो जाती है। यूं तो षष्ठी से दुर्गा पूजा पंडालों में पूजा शुरू होती है पर तृतीया का महत्व भी कुछ कम नहीं। बंगाल सहित कई जगहों पर शारदीय नवरात्र की तृतीया को ‘सिंदूर तृतीया’ के रूप में मनाया जाता है। तो क्या है ‘सिंदूर तृतीया’ का महत्तव और किस-किस तरह से करना चाहिए सिंदूर का इस्तेमाल कि घर से रहें सारी बाधाएं दूर और हो लक्ष्मी का वास, देखिए इस रिपोर्ट में।
 

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