हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के अंतर्गत गवास गांव में देवता गुडारू महाराज के सानिध्य में आयोजित तीन दिवसीय शांत महायज्ञ के तीसरे व अंतिम दिन उछड़-पाछड़ रस्म का आयोजन हुआ। इस दौरान देवताओं और खूंदों को उछड़ पाछड़ के साथ विदाई दी गई। इसके साथ ही धार्मिक आयोजन का समापन होगा। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलूओं के साथ झूमते रहे। इससे पहले दूसरे दिन सोमवार को शिखा फेर की मुख्य रस्म निभाई गई। इस दौरान हजारों लोग इस परंपरा के साक्षी बने। फेर रस्म के दौरान रोहटान खूंद ने सुबह 9:00 बजे मंदिर की परिक्रमा करके शिखा रस्म निभाई । इसके बाद शिखा रस्म दोपहर एक बजे मंदिर की छत पर पारंपरिक ढंग से पूजा अर्चना करके पूरी की गई। इस दौरान शिखा फेर रस्म में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। देवमयी माहौल में देवी-देवताओं के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। दिनभर लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलूओं के साथ झूमते रहे। गवास में आयोजित 36 सालों के बाद शांत महायज्ञ में देवी देवताओ के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आए देवलू और अन्य लोग पहुंचे।