हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के वाईएसपी बॉयज़ हॉस्टल में शनिवार रात पुलिस की नियमित चेकिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया। रात करीब 9:30 बजे डीएसपी जी.डी. शर्मा पुलिस टीम के साथ हॉस्टल पहुंचे। पुलिस के पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हो गए और कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। छात्रों का आरोप था कि पुलिस टीम ने शुरुआत में चीफ वार्डन और संबंधित हॉस्टल वार्डन की अनुमति व मौजूदगी के बिना छात्रावास में प्रवेश किया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय परिसर के हॉस्टलों में किसी भी तरह की जांच विश्वविद्यालय प्रशासन की मौजूदगी में ही की जानी चाहिए। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कुछ समय तक बहस भी हुई। एसएफआई एचपीयू इकाई के अध्यक्ष मुकेश ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को विश्वास में लिए बिना हॉस्टल में प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर का हिस्सा हैं और यहां किसी भी कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। वहीं, मामले पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर एवं चीफ वार्डन प्रो. रोशन लाल जिंटा ने स्पष्ट किया कि पुलिस की नियमित चेकिंग के दौरान शुरुआत में संबंधित वार्डन मौके पर मौजूद नहीं थे। सूचना मिलते ही वार्डन तुरंत हॉस्टल पहुंचे, जिसके बाद उनकी मौजूदगी में पुलिस ने नियमित जांच पूरी की। प्रो. जिंटा ने कहा कि यह कार्रवाई किसी एक छात्रावास तक सीमित नहीं थी, बल्कि विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों में चल रहे नियमित पुलिस चेकिंग अभियान का हिस्सा थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई और इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा सहयोग रहा। घटना के बाद हॉस्टल परिसर में देर रात तक इस विषय पर चर्चा होती रही। हालांकि, पुलिस विभाग की ओर से इस मामले में अलग से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।