जोधपुर रेलवे स्टेशन पर रोज यात्रियों का बोझ उठाने वाले दो कुलियों बेटों ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन किया है। कुली शिवराम चौधरी के बेटे सौरभ कुमार और कुली कैलाश राम के बेटे बजरंग कुमावत ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे हालात कभी आड़े नहीं आते।
शिवराम चौधरी ने बताया कि उनका बेटा सौरभ निजी कोचिंग में पढ़ाई करता था और रोजाना 8 से 10 घंटे तक घर पर भी पढ़ता था। तीसरे प्रयास में उसे सफलता मिली है। सौरभ ने 523 अंक प्राप्त किए और वर्तमान में बेंगलुरु में पढ़ाई कर रहा है। शिवराम ने कहा कि बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने फीस और किताबों के पैसे जुटाने के लिए कर्ज तक लिया लेकिन सौरभ के सपनों को अधूरा नहीं छोड़ा।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में उसकी मां की तबीयत बिगड़ी थी, तब उचित इलाज न मिलने और झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही के कारण सौरभ ने ठान लिया कि वह बड़ा होकर एक अच्छा डॉक्टर बनेगा और समाज की सेवा करेगा।
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वहीं कैलाश राम ने बताया कि कुली का काम निश्चित आमदनी वाला नहीं है लेकिन बेटे बजरंग का सपना शुरू से ही डॉक्टर बनने का था। उसकी फीस और किताबों के लिए उन्हें भी कर्ज लेना पड़ा। आज बजरंग ने दूसरे प्रयास में 541 अंक लाकर परिवार का सपना पूरा किया है। कैलाश राम ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं बजरंग, गणेश और देवेंद्र, जिनमें सभी पढ़ाई कर रहे हैं।
दोनों कुलियों का कहना है कि अब उनके बेटे न केवल अपने परिवार की बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी उठाएंगे और एक अच्छे चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करेंगे।