भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों की सीमा पर स्थित घने जंगलों में लगी भीषण आग ने बीते दो दिनों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें भीलवाड़ा जिले के आरोली और साईमाला संरक्षित वन क्षेत्र से फैलते हुए चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं के पेड़ोक्स क्षेत्र तक पहुंच गईं। इस अग्निकांड में करीब 175 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया, जिससे बड़ी संख्या में वन्य जीवों की मृत्यु हो गई और वन संपदा को भारी नुकसान हुआ।
देर रात तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैलते हुए बेगूं क्षेत्र के रावडदा और सामरिया ब्लॉक होते हुए चरछा ब्लॉक के जंगल तक पहुंच गई। जंगल में सूखी लकड़ियां और झाड़ियों की अधिकता के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। लपटों की भयावहता ने आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
यह भी पढ़ें: ड्राइवर और एयर होस्टेस की लव स्टोरी, कश्मीरी लड़की गांव के लड़के के प्यार में हुई पागल
आग को फैलने से रोकने के लिए बेगूं वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाई। रात से ही आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया, जिसमें नगर पालिका बेगूं की दमकल गाड़ियों की मदद ली गई। करीब 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग के बढ़ते वेग को रोका गया। हालांकि, अब भी वन विभाग की टीम स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से आग को पूरी तरह बुझाने में जुटी हुई है।
यह भी पढ़ें: टाइगर साइटिंग का हॉटस्पॉट बना सरिस्का, हर दिन बढ़ रही सैलानियों की भीड़, जल्द मिलेंगी नई सुविधाएं
बताया गया है कि इस आग से न केवल वन संपदा का बड़ा नुकसान हुआ, बल्कि जंगल में निवास करने वाले कई जीव-जंतु इसकी चपेट में आ गए। प्रशासन ने क्षेत्र के ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने की अपील की है। वन विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटा है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की योजना बना रहा है। वन विभाग के अधिकारी अभी तक हुए नुकसान के बारे में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में नुकसान का आकलन करके रिपेार्ट तैयार की जा रही है।