27 दिसंबर की रात हुई बारिश और ओलावृष्टि ने मालाखेड़ा क्षेत्र के गांवों में खड़ी सरसों और चने की फसल को बुरी तरह से नष्ट कर दिया। केरवावाल, खरखड़ा, बुर्जा वाला सहित कई गांवों के किसानों ने फसल के नुकसान का सही आकलन न होने और पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर से मुलाकात की और न्याय की गुहार लगाई।
केरवावाल गांव के सरपंच खेमाराम ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण फसल लगभग 100% नष्ट हो चुकी है लेकिन जब पटवारी ने नुकसान का आकलन किया तो 10-20% नुकसान दिखाकर रिपोर्ट भेज दी। सरपंच और ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी पद्मसिंह ने ग्रामीणों से प्रति बीघा 500 रुपये रिश्वत की मांग की और कहा कि पैसे मिलने पर ही वह नुकसान को 100% दिखाएगा।
खरखड़ा गांव के किसानों ने भी बताया कि उनकी पूरी फसल नष्ट हो चुकी है, लेकिन पटवारी ने आंकड़े जान-बूझकर गलत तैयार किए हैं। किसानों ने कहा कि उनके पास मुआवजे की उम्मीद के अलावा कोई विकल्प नहीं है ऐसे में रिश्वत देने के लिए पैसे कहां से लाएं?
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया कि फसल का दुबारा मौका मुआयना किया जाए और सही आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह भी शिकायत की कि फसल बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचे, जबकि उनकी उपस्थिति जरूरी थी।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला कलेक्टर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करते तो वे जयपुर जाकर उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाएंगे। उनका कहना है कि फसल नुकसान के कारण वे पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं और इस पर मुआवजे के लिए रिश्वत मांगना किसानों के साथ अन्याय है।
उनका कहना है कि पटवारी ने बिना बीमा कंपनियों को मौके पर बुलाए ही कार्रवाई पूरी कर दी जिससे सही आकलन में भी बाधा उत्पन्न हुई। किसानों ने मांग की है कि फसल बीमा कंपनियों को मौके पर बुलाकर उनकी फसल का सही मूल्यांकन किया जाए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को संभाल सकें।