पंजाब में बढ़ते नशे के खिलाफ आवाज उठाने निकले समाजसेवी टीटू बाणिया और उनके समर्थकों का विरोध प्रदर्शन उस समय बीच रास्ते ही थम गया, जब पुलिस ने उन्हें एसएसपी कार्यालय पहुंचने से पहले रोक लिया। कंधों पर प्रतीकात्मक अर्थी और बैंड-बाजे के साथ निकले प्रदर्शनकारियों का काफिला शहर में दाखिल नहीं होने दिया गया। विरोध की गर्मी कुछ देर बाद ढाबे पर चाय की चुस्कियों के बीच ठंडी पड़ गई और एसएसपी को दिया जाने वाला ज्ञापन मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को ही सौंप दिया गया। जानकारी के अनुसार टीटू बाणिया अपने समर्थकों के साथ नशे के खिलाफ प्रशासन को जवाबदेह बनाने और एसएसपी जगराओं को ज्ञापन देने के लिए रवाना हुए थे। लेकिन शहर की सीमा पर थाना दाखा के एसएचओ कुलजिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने काफिले को रोक लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें एक निजी ढाबे पर बैठा दिया गया। कुछ देर बाद डीएसपी दाखा करण सिंह संधू भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेकर भरोसा दिलाया कि इसे संबंधित अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने एहतियातन काफिले को शहर में प्रवेश नहीं करने दिया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। घटनाक्रम पर उठे सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नशे जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने निकले प्रदर्शनकारियों को एसएसपी कार्यालय तक जाने से पहले ही रोक दिया गया। विरोध प्रदर्शन सरकारी दफ्तर के बाहर होने के बजाय ढाबे पर बातचीत और चाय के दौर में सिमट गया, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस का पक्ष थाना दाखा के एसएचओ कुलजिंदर सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारियों का ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है। इसे नियमानुसार संबंधित अधिकारियों के माध्यम से आगे भेजा जाएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अब इलाके में चर्चा इस बात की है कि नशे जैसे गंभीर मुद्दे पर उठने वाली आवाजें क्या केवल आश्वासनों तक ही सीमित रहेंगी या प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई भी करेगा।