अपनी मांगों को लेकर पिछले आठ दिनों से हड़ताल पर बैठे सफाई सेवकों का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। सरकार की ओर से लगातार अनदेखी किए जाने से नाराज कर्मचारियों ने शहर में जोरदार रोष मार्च निकालकर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक संघर्ष और तेज किया जाएगा। हड़ताल ने नगर काउंसिल की व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी है। जिस नगर काउंसिल पर पूरे शहर को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी है, आज वही नगर काउंसिल कूड़े के ढेर पर बैठी नजर आ रही है। कार्यालय परिसर में जगह-जगह कूड़े के पहाड़ खड़े हैं, बदबू से कर्मचारियों और लोगों का वहां खड़ा होना मुश्किल हो गया है। यह नजारा प्रशासन के स्वच्छता के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। विडंबना यह है कि यही अधिकारी स्कूलों और शहरवासियों को स्वच्छता का संदेश देते हैं, जबकि उनका अपना कार्यालय गंदगी से अटा पड़ा है। हड़ताल का असर अब पूरे जगराओं शहर में साफ दिखाई देने लगा है। मोहल्लों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर कूड़ा जमा होने से लोगों का जीना दूभर हो गया है। हर तरफ फैली बदबू और गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और सरकार अब भी चुप्पी साधे हुए हैं। रोष मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और विधायक बीबी सरबजीत कौर माणूके के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने तक को तैयार नहीं है। कर्मचारियों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत शुरू नहीं की तो आंदोलन को पूरे पंजाब में और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इंकलाबी केंद्र पंजाब के जनरल सचिव कंवलजीत खन्ना ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। वहीं सफाई सेवक यूनियन पंजाब के जिला लुधियाना प्रधान अरुण गिल ने चेतावनी दी कि सरकार की चुप्पी अगर इसी तरह जारी रही तो आंदोलन पूरे प्रदेश में बड़ा जनआंदोलन बन जाएगा।