कालका-शिमला हाईवे पर एचएमटी की दीवार के पीछे चल रहे वन खेल का सच जानने के लिए जब अमर उजाला की टीम ने शनिवार को अपनी जान जोखिम में डालकर जब दुर्गम रास्तों और घने जंगल के भीतर करीब दो किलोमीटर की पदयात्रा की, तो मंजर देख आंखें फटी रह गईं। हाईवे के शोर से दूर, जंगल के सीने पर माफिया ने मौत का तांडव मचाया है। यहां एक-दो नहीं, बल्कि साढे़ तीन हजार से ज्यादा खैर के पेड़ों को बेरहमी से काटा गया है। पतले पेड़ों को वैसे ही काटकर छोड़ दिया गया है। जो मोटे पेड़ हैं, उन्हें ही उठाकर खैर माफिया लेकर गए हैं। वन्यजीव विभाग ने जांच के लिए महज 300 पेड़ों की बात की थी, वे तो सिर्फ ट्रेलर थे। असल फिल्म तो जंगल की उस गहराई में है जहां वन विभाग के अधिकारी अभी तक पहुंच नहीं पाए हैं। जानकारों की मानें तो वन विभाग के एरिया में काटे गए पेड़ों की बाजार में कीमत करोड़ों रुपये में है। जानकारों के मुताबिक, इन पेड़ों की बाजार में कीमत करोड़ों रुपये है।