पंजाब सरकार की नीतियों और किसानों-मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने मंगलवार को चब्बा गांव से आंदोलन के नए चरण का आगाज किया। संगठन की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ फ्लेक्सियां लगाई गईं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि यह अभियान अमृतसर के आसपास के करीब 40 गांवों तक पहुंचाया जाएगा और लोगों को आंदोलन के लिए लामबंद किया जाएगा। पंधेर ने बताया कि आने वाले दिनों में पंजाब के सभी जिलों में डीसी कार्यालयों के सामने एक दिवसीय मोर्चे लगाए जाएंगे। इसके बाद 14 से 18 सितंबर तक मंत्रियों के घरों के बाहर पांच दिवसीय बड़ा मोर्चा लगाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर रेलवे ट्रैक जाम करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने 23 फसलों पर एमएसपी देने की बात कही थी। संगठन की मांग है कि बासमती, आलू, मक्का, सरसों और कपास समेत अन्य फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लाकर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। किसानों और मजदूरों का कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई गई। पानी और नशे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा पंधेर ने पंजाब के पानी के बंटवारे को रिपेरियन सिद्धांत के आधार पर करने, भूजल स्तर गिरने से रोकने के लिए रिचार्जिंग की व्यवस्था करने और कॉरपोरेट घरानों द्वारा पानी के दोहन पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने पंजाब सरकार से लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की भी मांग की। नशे के मुद्दे पर उन्होंने सरकार से युवाओं को रोजगार देने और किए गए वादे पूरे करने की मांग की। उन्होंने पंजाब में पंजाबी भाषा को प्राथमिकता देने तथा सरकारी रोजगार में पंजाबियों के लिए 80 से 85 प्रतिशत आरक्षण की मांग रखी। पंधेर ने कहा कि संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसान संगठनों के साथ सीधे बातचीत कर समस्याओं का समाधान करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को आर-पार की लड़ाई में बदला जा सकता है। साथ ही पंजाबवासियों से आंदोलन में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की।