बेअदबी के मामलों और उनसे जुड़े कानून को लेकर सिख संगठनों तथा सरकार के बीच मतभेद गहराते नजर आ रहे हैं। विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने बेअदबी की घटनाओं में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। एसजीपीसी सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बेअदबी कानून का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को कड़ी सजा दिलाना होना चाहिए, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया में देरी से सिख समुदाय में नाराजगी बढ़ रही है। साथ ही कुछ सरकारी फैसलों को सिख परंपराओं और मर्यादाओं के विपरीत बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संबंध में लंबे समय से विभिन्न संगठनों द्वारा संघर्ष और अरदास की जा रही है। सिख नेताओं को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और समुदाय की चिंताओं का समाधान करेगी। ग्रेवाल ने कहा कि सिख समाज की धार्मिक भावनाओं और न्याय की अपेक्षाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील विषय पर क्या निर्णय लेती है और समुदाय के बीच पैदा हुई आशंकाओं को किस प्रकार दूर करती है।