गुरुद्वारा प्रबंध सुधार आंदोलन के प्रमुख नेता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के संस्थापक सदस्यों में शामिल सरदार तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं पुण्यशताब्दी शुक्रवार को एसजीपीसी की ओर से श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। एसजीपीसी कार्यालय स्थित सरदार तेजा सिंह समुंदरी हॉल में श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए और धार्मिक समागम आयोजित किया गया, जिसमें सिंह साहिबान, संत-महापुरुष, एसजीपीसी पदाधिकारी, अकाली नेता और बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने अपना संपूर्ण जीवन गुरु घर, पंथ और संस्थाओं की मजबूती के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति भले ही चले जाते हैं, लेकिन संस्थाएं सदियों तक समाज का मार्गदर्शन करती हैं। उन्होंने समुंदरी के शिक्षा प्रसार, महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाने और पंथक संस्थाओं को मजबूत बनाने में योगदान को ऐतिहासिक बताया। दमदमी टकसाल के प्रमुख हर्नाम सिंह धुमा ने कहा कि समुंदरी ने चाबियां मोर्चा, जैतो मोर्चा, गुरु के बाग मोर्चा और गुरुद्वारा रकाबगंज से जुड़े संघर्षों में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जेल यातनाएं सहने और लाहौर जेल में शहादत देने को उनके अद्वितीय बलिदान का प्रतीक बताया। दिल्ली के राज्यपाल तरनजीत सिंह समुंदरी ने कहा कि सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने सामाजिक सुधारों के साथ-साथ दलित समाज के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि समुंदरी ने छुआछूत के खिलाफ समाज को समानता का संदेश दिया और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की मिसाल पेश की। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि केवल 44 वर्ष की आयु में शहादत देने के बावजूद समुंदरी ऐसी विरासत छोड़ गए, जो आज भी सिख पंथ को प्रेरित करती है। उन्होंने मौजूदा समय में पंथक एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए आपसी मतभेद भुलाकर गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं पर चलने का आह्वान किया। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ और जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह ने भी समुंदरी के योगदान को याद करते हुए युवाओं से उनके आदर्शों पर चलने तथा पंथ की मजबूती और एकता के लिए कार्य करने की अपील की।