श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी को रोकने और इसे लेकर कानून बनाने के संबंध में एसजीपीसी ने पंथक संगठनों की विशेष बैठक बुलाई। तेजा सिंह समुंदरी हॉल में हुई इस बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री केसगढ़ साहिब और तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार, श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी बाबा हरनाम सिंह धुम्मा सहित कई प्रमुख पंथक नेताओं ने भाग लिया। बैठक में सभी वक्ताओं ने जोर दिया कि सिख मामलों से जुड़ा कोई भी कानून या निर्णय सरकारों की मनमानी से नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी गंभीर और चिंताजनक है और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान जरूरी है लेकिन कानून सिख विचारधारा और पंथक भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए। एसजीपीसी अध्यक्ष ने बैठक में विशेष प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से मंजूर किया गया। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिखों के लिए केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि सीधे गुरु का दर्जा रखते हैं। कानून बनाते समय पंथक राय को शामिल करना आवश्यक है ताकि यह केवल राजनीतिक या सरकारी उपाय न बने बल्कि आस्था, विश्वास और धार्मिक मूल्यों की रक्षा करता रहे। बैठक में मांग की गई कि पंजाब सरकार कानून का ड्राफ्ट पहले एसजीपीसी को भेजे और पंथक विचारों के अनुसार राय प्राप्त करने के बाद ही इसे लागू किया जाए। प्रस्ताव के अनुसार यह कानून सिर्फ़ नियम नहीं, बल्कि पंथ की चिंता और आस्था की रक्षा का ठोस कोड होना चाहिए।