शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब सरकार द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान से जुड़े कानून में किए गए संशोधनों पर गंभीर आपत्ति जताई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धामी ने कहा कि सरकार ने श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान वर्ष 2008 के एक्ट में बदलाव किए, लेकिन इस मामले में न तो एसजीपीसी और न ही श्री अकाल तख्त साहिब से कोई उचित सलाह-मशविरा किया गया। धामी ने कहा कि एसजीपीसी को बेअदबी मामलों में सख्त सजा दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि समिति इसका समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि एक्ट की कुछ धाराएं धार्मिक अधिकारों और एसजीपीसी के विशेषाधिकारों पर सीधा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने विशेष रूप से “कस्टोडियन” नियुक्त करने और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने संबंधी प्रावधानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के पास पहले से ही स्वरूपों की सुरक्षा और रिकॉर्ड का आधुनिक सिस्टम मौजूद है। हर स्वरूप को गुरुद्वारों की जांच, सीसीटीवी, अग्निशमन व्यवस्था और ग्रंथी सिंहों की पुष्टि के बाद ही सौंपा जाता है। धामी ने कहा कि स्वरूपों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से भी उचित नहीं है। धामी ने बताया कि इस मुद्दे पर पहले तख्त श्री दमदमा साहिब में बैठक की जा चुकी है। अब 31 मई को गुरुद्वारा श्री बाबा बकाला साहिब में बड़ा पंथक सम्मेलन बुलाया गया है, जिसमें विभिन्न पंथक जत्थेबंदियों, निहंग सिंह दलों, दमदमी टकसाल और अन्य धार्मिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक अधिकारों और सिख संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है।