खेलों से दूर हो रहे बच्चों को ग्राउंड में लेकर आना खेल विभाग के हाथ में नहीं है, बल्कि खुद मां-बाप इसका जिम्मा उठाना चाहिए। आज हरेक छोटे से लेकर बड़ा बच्चा मोबाइल की गिरफ्त में है। जिससे कि बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास दोनों नहीं हो पा रहे है। यह कहना था अमृतसर जिला खेल अफसर सविता कुमारी का। उन्होंने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य भर में नर्सिंग कोच भर्ती कर रही है, जो कि 10 से 16 साल तक के बच्चों को ग्राउंड में लाकर उनको खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने बताया कि अमृतसर जिले की बात करें तो डिस्ट्रिक्ट कोचों के अलावा भी सरकार ने हर ब्लॉक से बच्चों को खेलों के साथ जोड़ने के लिए 19 नर्सिंग कोच भर्ती किए है। इसके अलावा ग्राउंड में घायल होने वाले खिलाड़ियों के इलाज के लिए भी हरेक अमृतसर में चार जिलों का मेडिकल सेंटर बनाया जा रहा है, जोकि अप्रैल 2026 तक शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल सेंटर में खेल विभाग के डॉक्टर सप्ताह में 2 या 3 दिन अमृतसर, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट के खिलाड़ियों का चेकअप करेंगे और चोटिल खिलाड़ियों का इलाज करेंगे।