निवाड़ी कलेक्टर कार्यालय के बाहर हुए उपद्रव कांड के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार किसानों को बरगला कर प्रभारी मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने हंगामा व उपद्रव कराने वालों पर यह कार्रवाई की गई है। प्रकरण में 7 आरोपी नामजद हैं, जबकि 22 अन्य असामाजिक तत्वों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा के वाहन को रोकने का प्रयास किया और कलेक्टर निवाड़ी की गाड़ी को जबरदस्ती रुकवाया। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ झूमा-झटकी की गई और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा, आपराधिक बल प्रयोग सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
नामजद आरोपियों में गंगाराम कुशवाहा निवासी राधापुर ओरछा, प्रमोद कुशवाहा (भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य )निवासी पोहा निवाड़ी, प्रीतम हरप्रसाद कुशवाहा निवासी असाटी, डॉ. जगत कुशवाहा निवासी ओरछा, संजीव पिता विनोद केसरिया निवासी झांसी (उ.प्र.), सुनील पिता बृजेंद्र राजपूत निवासी आजादपुर निवाड़ी तथा उर्मिला कुशवाहा निवासी गुदरई शामिल हैं। इनके साथ 22 अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
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पुलिस के अनुसार, इन सभी ने मिलकर गुदरई गांव के किसानों को उकसाया, भीड़ एकत्र करवाई और प्रभारी मंत्री, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उपद्रव मचाया। शासकीय वाहनों को रोका गया और जानबूझकर हिंसक माहौल पैदा कर कानून व्यवस्था को चुनौती दी गई। बताया गया कि ओरछा तहसील के गुदरई गांव के किसान अपनी जमीन के सीमांकन और कब्जे से जुड़ी शिकायत लेकर प्रभारी मंत्री से मिलने कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे।
बैठक के बाद मंत्री ने किसानों से आवेदन लिया, लेकिन इसी दौरान 25-30 असामाजिक तत्वों ने किसानों को भड़का कर हंगामा शुरू कर दिया। कलेक्टर की गाड़ी रोकी गई और स्थिति बिगाड़ने का प्रयास किया गया। उपनिरीक्षक शाहिद खान की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है, वहीं पुलिस अन्य संदिग्ध भूमिकाओं की भी जांच कर रही है।