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MP News: भैरुंदा में किसान शक्ति का प्रदर्शन, सड़क पर दाल-बाटी, हनुमान चालीसा और पांच किलोमीटर लंबा जाम

Mon, 06 Jul 2026 08:28 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र भैरुंदा में सोमवार को मूंग खरीदी को लेकर किसानों का गुस्सा विस्फोटक रूप में सामने आया। किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में हजारों किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर इंदौर-भोपाल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। करीब पांच घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज आंदोलन से पूरा क्षेत्र थम गया। किसानों ने सड़क को ही धरना स्थल बना दिया, कंडों पर बाटी सेंकी, चाय बनाई, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया और सरकार से किसानों के हित में निर्णय लेने की प्रार्थना की। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन लगातार आंदोलनकारियों को समझाने में जुटे रहे, लेकिन किसान जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।

सुबह करीब 10 बजे से कृषि उपज मंडी परिसर में किसानों का जमावड़ा शुरू हो गया। देखते ही देखते हजारों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ मंडी पहुंच गए। दोपहर तक करीब 2 हजार ट्रैक्टरों और एक हार्वेस्टर के साथ विशाल रैली निकाली गई। किसान नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग पर पहुंचे, जहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। किसान नेताओं का दावा है कि आंदोलन में करीब पांच हजार किसानों ने भाग लिया।

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दुर्गा चौक पर थम गया ट्रैफिक, हाईवे पर डट गए किसान
दोपहर करीब 2 बजे दुर्गा मंदिर चौक पर पहुंचते ही किसानों ने रैली को धरने में बदल दिया। सैकड़ों ट्रैक्टर और वाहन सड़क पर खड़े कर दिए गए, जिससे इंदौर-भोपाल हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। घेरा डालो-डेरा डालो के नारों के बीच किसानों ने सड़क पर कब्जा जमाए रखा। प्रशासन की समझाइश के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

सड़क पर बनी दाल-बाटी, आंदोलन बना अनोखा विरोध
आंदोलन के दौरान विरोध का अनोखा दृश्य देखने को मिला। किसानों ने कंडे जलाकर सड़क पर ही आटा गूंथा और दाल-बाटी तैयार की। अचार के साथ भोजन किया गया और चाय बनाकर वहीं पी गई। इसके बाद सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। किसानों ने कहा कि यह केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है।

इन मांगों पर अड़े किसान, कलेक्टर को बुलाने की जिद
किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी गजेंद्र जाट ने कहा कि किसानों की मुख्य मांग मूंग की 100 प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और प्रति एकड़ 6 क्विंटल तक खरीदी सुनिश्चित करने की है। साथ ही खरीदी प्रक्रिया में लागू सीमाएं और तकनीकी बाधाएं समाप्त करने की मांग भी की गई। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि ज्ञापन केवल जिला कलेक्टर को ही सौंपा जाएगा। जब तक कलेक्टर मौके पर नहीं आएंगे, आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

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5 किलोमीटर लंबा जाम, आमजन और यात्री बेहाल
हाईवे बंद होते ही दोनों ओर करीब 5-5 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इंदौर, भोपाल और सीहोर की ओर जाने वाले सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। यात्री बसें, निजी वाहन और आवश्यक सेवाओं के वाहन भी जाम में अटक गए। तेज गर्मी के बीच यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के अंदरूनी मार्गों पर भी यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

पुलिस अलर्ट मोड पर, ट्रैफिक डायवर्ट कर संभाली स्थिति
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात को वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया। यात्री बसों को बृहदेव पुलिया होते हुए सोठिया और नहर चौराहा मार्ग की ओर डायवर्ट किया गया, जबकि सीहोर की दिशा में जाने वाले वाहनों को जुगला-बिजला मार्ग से भेजा गया। इसके बावजूद लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रही।

प्रशासन की लगातार कोशिशें, समाधान नहीं निकला
आंदोलन समाप्त कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसान नेताओं से चर्चा करते रहे। भैरुंदा एसडीएम सुधीर कुशवाह ने बताया कि किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों से लगातार संवाद किया जा रहा है और समाधान निकालने का प्रयास जारी है। हालांकि किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे और धरना जारी है।

गृह क्षेत्र में आंदोलन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह क्षेत्र में हुए इस बड़े किसान आंदोलन ने प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी। हजारों किसानों की मौजूदगी, ट्रैक्टरों का शक्ति प्रदर्शन और हाईवे पर पांच घंटे तक चले चक्काजाम ने यह संदेश दिया कि मूंग खरीदी का मुद्दा अब किसानों के लिए निर्णायक संघर्ष का रूप ले चुका है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि किसानों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। हाईवे बना आंदोलन का अखाड़ा- फोटो : credit   हाईवे बना आंदोलन का अखाड़ा- फोटो : credit   हाईवे बना आंदोलन का अखाड़ा- फोटो : credit  

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