मप्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पेश इस बजट को सरकार ने विकासोन्मुख और जनकल्याणकारी बताया है लेकिन जमीनी स्तर पर व्यापारियों, शिक्षाविदों और किसानों की ओर से मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों का कहना है कि कुछ प्रावधान सकारात्मक हैं लेकिन अपेक्षाओं के अनुरूप ठोस राहत नहीं दिखी।
रीवा के स्थानीय व्यापारी प्रशांत गुप्ता ने कहा कि बजट से व्यापार जगत को बड़ी राहत की उम्मीद थी, जो पूरी होती नजर नहीं आ रही। उनका मानना है कि पिछले वर्षों में राज्य पर बढ़े कर्ज का असर बजट की संभावनाओं पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार पर कर्ज का दबाव होता है, तो नए प्रोत्साहन सीमित हो जाते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित होता है।
स्कूल संचालक राजकुमार मिश्रा के अनुसार किसानों को कुछ राहत दी गई है लेकिन आय बढ़ने जैसे बड़े लक्ष्यों की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आते। उन्होंने छात्रों के लिए किताबों, सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों में पर्याप्त वृद्धि न होने की बात भी कही। उनके मुताबिक यह बजट पिछले बजट जैसा ही प्रतीत होता है।
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किसान चन्द्र भूषण सिंह ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार किसानों और युवाओं को लॉलीपॉप दे रही है। बजट में केवल छोटे-छोटे वादे और घोषणाएं हैं, जो रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही। उनका कहना है कि इससे तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा मिल रहा है।
कुल मिलाकर बजट को लेकर प्रदेश भर में बहस जारी है। जहां सरकार इसे जनकल्याण और विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विभिन्न वर्गों का कहना है कि वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।