कहते हैं बच्चे देश का भविष्य हैं। लेकिन इनके भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। जी हां, ऐसा हम इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि जब ये पढ़ाई के लिए स्कूल जाते हैं तो उन्हें शिक्षक नहीं मिलते...उनकी पढ़ाई रामभरोसे चल रही है। हालांकि, ऐसा एक या दो स्कूल का हाल नहीं बल्कि जिले 1990 शासकीय स्कूलों की स्थिति है। जहां प्राचार्य से लेकर शिक्षकों की भारी कमी झेल रहे हैं।
लोगों की माने तो सरकार बड़ी-बड़ी शासकीय स्कूल, भवन और नई-नई तकनीक तो ला रही है। लेकिन बच्चों को पढ़ाने और समझाने के लिए स्कूलों में शिक्षक ही नहीं रहते। कटनी जिले के बिगड़ैल शिक्षा व्यवस्था को जानने अमर उजाला की टीम ने पांच स्कूलों का जायज़ा लिया, जिसमें प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल रहे।
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शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम कैलवारा कला शासकीय माध्यमिक स्कूल पहुंचे। जहां कक्षा 8वीं की छात्रा रिया कोल ने बताया कि अभी स्कूल शुरू हुआ है, पढ़ाई ठीक हो रही है। लेकिन स्कूल में शिक्षक की कमी बनी हुई है। जो भी टीचर हैं, अच्छे से पढ़ाते हैं। ऐसा ही कुछ 8वीं की छात्रा कीर्ति कोल ने बताया, जिसके मुताबिक वो तीन किमी दूर कैलवारा कला स्कूल जाते हैं, शिक्षक कम हैं। इसलिए कुछ सब्जेक्ट की पढ़ाई घर में करना पड़ रहा है।
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वहीं, छात्राओं के परिजन सृजन कोल और वर्षा कोल ने बताया कि टिकरिया प्राथमिक स्कूल घर के पास है। लेकिन यहां एक ही शिक्षक है और पढ़ाई भी ठीक नहीं थी। इसलिए कैलवारा कला में बच्चे जाते हैं। वहां भी शिक्षक की कमी और पढ़ाई उतनी ठीक नहीं होती है। हम लोग मजदूरी करते हैं, अच्छे पैसे होते तो प्राइवेट स्कूल में भेजते। लेकिन अभी तो सरकार से उम्मीद है। स्कूल में शिक्षक बढ़ाए, ताकि बच्चों का अच्छा भविष्य बन सके।
आपको बता दें कि कटनी के 1990 स्कूलों में एक लाख 80 हजार 896 छात्र-छात्राओं के एडमिशन दर्ज हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए यूं तो 8,472...लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते महज 4612 शासकीय शिक्षक मौजूद हैं। इस हिसाब से स्कूली बच्चों को पढ़ाने वाले तीन हजार 860 टीचर्स की कमी बनी हुई है।
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बात अगर 1990 स्कूलों की करें तो इनमें सबसे ज्यादा 1282 प्राथमिक स्कूल हैं, फिर 532 माध्यमिक स्कूल तो हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल में 176 शासकीय रूप से दर्ज हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी पृथ्वीपाल सिंह की माने तो जिले में प्राथमिक शाला, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल को मिलाकर जिले में 1990 स्कूलों में 3,860 शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसके लिए हम संविदा, अतिथि शिक्षकों की मदद लेते हैं। वहीं, इस वर्ष सरकार द्वारा शिक्षकों की भर्ती कराई जा रही है, इससे भी शिक्षकों की पूर्ति की जाएगी।