दमोह शहर में बुधवार सुबह अचानक पुलिस कर्मियों ने गोलियां चलाना शुरू कर दिया। फायरिंग की आवाज सुनकर शहरवासी हैरान रह गए और अपने घरों से बाहर निकलकर उस जगह पहुंचे जहां गोलियां चल रही थीं। वहां जाकर जब सच्चाई का पता चला तो लोगों की शंका का समाधान हुआ। होलिका पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए एक अनूठी पहल की गई। एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी के निर्देश पर बुधवार सुबह पुरैना तालाब के पास महाराणा प्रताप स्कूल मैदान में बलवा ड्रिल का आयोजन किया गया। जिसमें पुलिस के जवान हाथों में डंडा और बंदूक लेकर पहुंचे थे। जिस स्थान पर गोलियां चल रही थी वहां काफी बड़ा मैदान होने के साथ पहाड़ी है। जिससे गोलियों की आवाज गूंज रही थी।
यह पहला मौका था जब पुलिस ने अपने मैदान के बजाय किसी दूसरे स्थान पर बलवा ड्रिल की। सुबह करीब 9 बजे ड्रिल शुरू हुई। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग चौंक गए। शुरुआत में लोगों ने इसे पटाखों की आवाज समझा, लेकिन लगातार गोलियों की आवाज से लोगों को लगा कि कोई बवाल हो गया है जिसमें फायरिंग हो रही है। जब लोग स्कूल मैदान पहुंचे तो वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। दंगाइयों की भूमिका में भी वर्दीधारी पुलिसकर्मी थे। एसपी ने बताया कि त्योहार से पहले यह तैयारी दो कारणों से की जाती है। पहला, इससे लोगों को भरोसा मिलता है कि पुलिस उनके साथ है। दूसरा, बदमाशों को संदेश मिलता है कि गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई होगी।
इस ड्रिल से पुलिस को भी अभ्यास का मौका मिलता है। इससे वे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बेहतर तैयारी कर पाते हैं। पुलिस के जवान एक ओर से नारेबाजी कर रहे थे और आगे की ओर बढ़ रहे थे। वहीं दूसरी तरफ पुलिस के जवान उन्हें रोक रहे थे। काफी देर यह मॉक ड्रिल चलती रही, जिसे देखने लोगों की भीड़ लगी रही।