दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक के दोनी गांव में खुदाई के दौरान जमीन से काले मोती निकल रहे हैं। जिसे हजारों रुपए की बोली लगाकर बाहरी लोग खरीदने आ रहे हैं। यह खबर जैसे ही गांव में फैली तो यहां खुदाई करने सुबह से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं। इन मोतियों को दसवीं शताब्दी का बताया जा रहा है। हालांकि अभी पुरातत्व विभाग ने उसकी पुष्टि नहीं की है। बता दें इसी स्थान पर तीन दिन पहले खुदाई के दौरान प्राचीन प्रतिमाएं निकली थीं जो सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं और अभी यहां पुरातत्व विभाग द्वारा लगातार खुदाई कराई जा रही है।
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ये है काले मोती की खासियत
बुजुर्ग बताते हैं कि काले रंग का यह मोती 9वीं-10वीं शताब्दी का लग रहा है, क्योंकि यहां उस समय राजा-महाराजाओं का राज था और वह इस काले मोती का उपयोग लड़ाई के दौरान अपने विरोधियों पर करते थे। वर्तमान समय में इस काले मोती का उपयोग मानसिक तनाव, डर, नींद में कमी आने पर किया जाता है। साथ ही इससे बुरी नज़र से बचाव होता है इसको आज की भाषा में हकीक कहा जाता है। यह शारीरिक को स्वास्थ्य बेहतर बनाता है, ऊर्जा का संचार करता है।
लोग अक्सर इस कंकड़ को गले में चैन और उंगली में अंगूठी में लगवाकर पहनते हैं।
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अंशुल साहू ने बताया कि काले रंग के मोती इस समय दोनी गांव में जमीन के नीचे से खुदाई के दौरान निकल रहे हैं। इसकी जानकारी लगते ही बाहरी लोग दोनी गांव पहुंचकर इन मोतियों को दो हजार से लेकर पांच हजार रुपए तक महंगे दामों में खरीद रहे हैं। पुरातत्व विभाग ग्वालियर के टाइम कीपर अजय द्विवेदी ने बताया कि दोनी गांव में खुदाई चल रही है। तीन दिन पहले वहां प्राचीन प्रतिमाएं निकली हैं। अभी वहां काले मोती निकलने की जानकारी उन्हें नहीं मिली है।