खजुराहो नृत्य महोत्सव में तबले और मृदंग की थाप, घुंघरूओं की झंकार, और सुघड़ भाव भंगिमाओं से लबरेज नृत्य की प्रस्तुतियां रोज देखने को मिल रही हैं। चंदेलों के बनाये वैभवशाली मंदिरों की आभा में जब घुंघरू रुनझुन करते हैं, तो मंदिरों पर उत्कीर्ण पाषाण प्रतिमाएं जीवंत हो उठती हैं। ये सारा मंजर एक ऐसा कोलाज़ बनाता है, जिसके सब रंग चटकीले होते हैं। नृत्य समारोह के छठे दिन भी यह अद्भुत आनंद पर्यटकों ने शिद्दत से महसूस किया।
Read More: Khajuraho Dance Festival: नृत्य की भाव भंगिमाओं से सजा आनंद का कोलाज, ओडिसी प्रस्तुतियों ने दी नई ऊंचाई