भारतीय पहलवान और पेरिस ओलंपिक मेडलिस्ट अमन सेहरावत ने बताया कि गांव में हमने शुरू से रेसलिंग का कल्चर देखा है। काका को देखा है, हमने बचपन से अखाड़ा देखा। लेकिन हमें ओलंपिक का पता नहीं था, हमें बस इतना पता था कि अच्छा रेसलर बनेंगे। जब मैं 10 साल का था तो छत्रसाल स्टेडियम छोड़कर आए थे। तब सुशील कुमार थे वहां। तब हमने देखा कि हमारे सामने दो-दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट कैसे प्रैक्टिस कर रहे हैं। रवि भाई कैसे प्रैक्टिस कर रहे हैं। वहीं से हमें लगा कि हम भी देश के लिए मेडल जीतेंगे।