आग, मोम और मिट्टी के संगम से परंपरा को नया आकार देते हुए एलयू के विद्यार्थी ढोकरा कला की सदियों पुरानी विरासत को सीख रहे हैं। ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय केंद्र में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित ढोकरा कार्यशाला में लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। यहां सचमुच आग, मोम और मिट्टी से परंपरा गढ़ने की प्रक्रिया को नजदीक से समझा और अभ्यास किया जा रहा है। नेशनल अवार्ड से सम्मानित कलाकार उदयराम झारा और बुधियारीन बाई झोरका प्रतिभागियों को पारंपरिक ढोकरा धातु शिल्प की तकनीक, डिजाइन निर्माण और ढलाई की विधि सिखा रहे हैं। विद्यार्थी कलाकारों से संवाद करते हुए इस लोक कला की बारीकियों को आत्मसात कर रहे हैं। 28 फरवरी तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य जनजातीय कला संरक्षण के साथ स्वच्छता और रचनात्मकता का संदेश देना भी है। अकादमी परिसर इन दिनों सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर है।