हनुमान के अपने राम हैं। लक्ष्मण और भारत के अपने राम हैं। सिया के अपने राम हैं। यहां तक कि कलयुग में राजनीतिक पार्टियों के भी अपने अपने राम हैं। इन सबके बीच इन दिनों एक महानाट्य की चर्चा पूरे देश में हो रही है जिसका शीर्षक है 'हमारे राम'। हमारे राम नाटक के लेखक लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार नरेश कात्यायन से सुनिए इस नाटक के शुरू होने से लेकर मंच पर उतरने तक की कहानी।