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Ramdhari Singh Dinkar:  सत्ता की महत्ता को चुनौती देने वाले कवि

काव्य डेस्क

Sahitya
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                                                  एक मनुज संचित करता है अर्थ पाप के बल से
और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता में ओज का स्वर ललकार में तब्दील होता है लेकिन उसमें विचार की सम्पदा है, वे श्रम के महत्व को स्वीकार करते हैं भाग्यवाद को तोड़ने की बात करते हैं।

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