विज्ञापन

Naresh Saxena ki kavita: टूटते तारों की आवाज़ें सुनाई नहीं देतीं

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  बिजलियों को अपनी चमक दिखाने की
इतनी जल्दी मचती थी
कि अपनी आवाज़ें पीछे छोड़ आती थीं
आवाज़ें आती थीं पीछा करतीं;
अपनी ग़ायब हो चुकी
बिजलियों को तलाशतीं

~नरेश सक्सेना 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile