बिजलियों को अपनी चमक दिखाने की इतनी जल्दी मचती थी कि अपनी आवाज़ें पीछे छोड़ आती थीं आवाज़ें आती थीं पीछा करतीं; अपनी ग़ायब हो चुकी बिजलियों को तलाशतीं ~नरेश सक्सेना
1 कविता