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Ramdhari Singh Dinkar ki kavita: मेरे नगपति! मेरे विशाल!

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  मेरे नगपति! मेरे विशाल!
साकार, दिव्य, गौरव विराट्,
पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल!
मेरी जननी के हिम-किरीट!
मेरे भारत के दिव्य भाल!
मेरे नगपति! मेरे विशाल!
 
1 month ago
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