शिवसेना की जम्मू-कश्मीर इकाई ने लद्दाख में लागू नई आबकारी नीति का विरोध करते हुए इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए खतरा बताया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में शराब कारोबार का विस्तार कर रही है, जबकि जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रही है। प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी ने कहा कि लद्दाख जैसे शांत और बौद्ध संस्कृति वाले क्षेत्र में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाना सामाजिक मूल्यों पर असर डाल सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के नशामुक्ति अभियान और शराब नीति में विरोधाभास है। शिवसेना ने मांग की है कि लद्दाख की नई आबकारी नीति वापस ली जाए और जम्मू-कश्मीर में शराब दुकानों के अनियंत्रित विस्तार पर रोक लगाई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो संगठन बड़े स्तर पर जन आंदोलन शुरू करेगा।