प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जम्मू और कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन (जेकेपीएससी) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 10+2 लेक्चरर पदों के लिए भर्ती नोटिफिकेशन में हिंदी और संस्कृत को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है। इसके बजाय अरबी और फारसी जैसी विदेशी भाषाओं को प्राथमिकता दी गई, जिन्हें भर्ती में शामिल किया गया था।