नई दिल्ली में लद्दाख के प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय के बीच हुई हालिया हाई पावर कमेटी की बैठक के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। यूनियन टेरिटरी के भविष्य को लेकर क्षेत्रीय संगठनों के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच समिति सदस्य कुंज़ेस डोलमा आलोचनाओं का सामना कर रही हैं। आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए डोलमा ने कहा कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेतीं। उन्होंने अपनी भूमिका को सरकार और जनता के बीच एक सेतु बताया और कहा कि विवाद से बचने के लिए चुप रहना उनकी भागीदारी के उद्देश्य को ही खत्म कर देता। डोलमा के अनुसार, बैठक से पहले लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के बीच हुई चर्चा में यह तय हुआ था कि बातचीत को केवल आर्टिकल 371 जैसे सुरक्षा प्रावधानों और विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश के मुद्दे पर केंद्रित रखा जाएगा, जबकि सिक्स्थ शेड्यूल और राज्य के दर्जे जैसे संवेदनशील विषयों से बचा जाएगा। हालांकि, उनका दावा है कि बैठक का एजेंडा बदल गया जब राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया गया और इस पर काफी समय चर्चा होती रही।