डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक “बहुत बड़ा और शानदार” व्यापार समझौता होने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने यह टिप्पणी व्हाइट हाउस में आयोजित ‘बिग ब्यूटीफुल इवेंट’ में की, जिसे अमेरिकी व्यापार रणनीति का भविष्य कहा जा रहा है। उनके इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान भारत-अमेरिका संबंधों पर केंद्रित कर दिया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ हफ्ते पहले भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच व्यापार समझौते को लेकर चार दिवसीय गुप्त वार्ता संपन्न हुई। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच औद्योगिक और कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने, टैरिफ में कटौती और गैर-टैरिफ अड़चनों को दूर करने पर फोकस किया गया।
ट्रंप ने कहा, “हमने चीन के साथ एक बेहतरीन सौदा किया है और हम एक और बहुत बड़ा सौदा करने जा रहे हैं, शायद भारत के साथ। हर कोई अब अमेरिका के साथ सौदा करना चाहता है।”
ट्रंप के बयान के बाद बाजार में हलचल तेज हो गई है। भारत सरकार की ओर से फिलहाल इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्ष अंतिम दौर की बातचीत में हैं।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के बीच यह बैठक 10 जून को समाप्त हुई थी। भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग सचिव राजेश अग्रवाल ने वार्ता का नेतृत्व किया, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (USTR) कार्यालय के अधिकारियों ने किया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने वार्ता के बाद कहा था: “हम निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं, व्यवसायों और नागरिकों को फायदा होगा।”
समझौते का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 190 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं, लेकिन इस समझौते से यह साझेदारी और गहरी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, व्यापार समझौते की बातचीत में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर फोकस किया गया:
1. औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क घटाना
2. भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच बढ़ाना
3. गैर-टैरिफ अड़चनें जैसे गुणवत्ता मानक, निर्यात नियंत्रण
4. डिजिटल ट्रेड और ई-कॉमर्स नियमों में लचीलापन
5. बौद्धिक संपदा संरक्षण और तकनीकी ट्रांसफर
यह समझौता दोनों देशों के लिए व्यापारिक रूप से ही नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब चीन के साथ अमेरिका के संबंधों में खटास बनी हुई है।
ट्रंप ने इसी कार्यक्रम में यह भी बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ एक नया व्यापार समझौता किया है, जो दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) की आपूर्ति को लेकर केंद्रित है। उन्होंने हालांकि इस समझौते के विवरण नहीं दिए, लेकिन व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि यह डील जिनेवा समझौते की तर्ज पर है।
विश्लेषकों का मानना है कि चीन के साथ हुए इस सौदे के तुरंत बाद भारत के साथ संभावित समझौते की घोषणा यह दिखाता है कि अमेरिका एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना चाहता है।
क्या भारत को फायदा होगा?
भारत को इस प्रस्तावित समझौते से कई लाभ हो सकते हैं:
• कृषि उत्पादों के लिए नया अमेरिकी बाजार
• भारतीय आईटी और फार्मा सेक्टर को नए अवसर
• अमेरिकी निवेश में वृद्धि
• टैरिफ कटौती से उत्पाद प्रतिस्पर्धी होंगे
• दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सहयोग
हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि भारत को अपनी डिजिटल नीति, डेटा सुरक्षा और घरेलू उद्योगों की रक्षा को लेकर सतर्क रहना होगा।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अपने-अपने हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।