पूरे देश में भाई- बहन के स्नेह का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। भाईयों के कलाई में राखी बांधते समय बहनों के चेहरे खिले हुए हैं। इस बीच जेल में रहने वाली भाई इस स्नेह से दूर ना रहे इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उमरिया के जिला जेल के बाहर सकड़ों बहनें अपने भाईयों से मिलने के लिए पहुंचीं। त्योहार के दिन सुबह से जेल के बाहर का नजारा भावुक हो गया।दरअसल, जेल के अंदर कैदियों के लिए राज्य शासन के निर्देश पर जेलर ने सभी कैदी भाइयों को राखी बांधने की व्यवस्था की गई। लंबे समय बाद अपने भाइयों से मिलने की खुशी अलग ही दिख रही है। दूर-दूर से आई बहनों ने अपने-अपने भाइयों के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनसे शपथ लिया। उन्होंने वादा लिया कि दोबारा ऐसा कोई कार्य न करें कि उनको जेल तक आना पड़े और शर्मिंदगी महसूस हो। वहीं रायपुर के जेल अधीक्षक योगेश सिंह ने बताया, "बंदियों के भाई-बहनों को राखी बांधने के लिए जेल में प्रवेश की अनुमति दी गई है। परिजनों को कोई तकलीफ न हो इसका ध्यान दिया गया है। सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय रखा गया है। कल तक 489 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। हमारा अनुमान है कि 1800 से 2000 बंदियों के परिजन पहुंच सकते हैं।"
मानपुर जनपद पंचायत सदस्य माया सिंह बताई कि हमारे पति यहां बंदी हैं। हम अपनी ननदों को लेकर यहां आए हैं ताकि उनकी बहनें अपने भाई को राखी बांध सकें। हम सभी बंदी भाइयों से अपेक्षा करते हैं कि दोबारा ऐसा कोई काम न करें ताकि उनको यहां आना पड़े। डिप्टी जेलर माखन सिंह मार्को ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिला जेल उमरिया में यह व्यवस्था की गई है। इसके तहत रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी बंदी भाइयों की बहनें सुविधा से राखी बांध सकें। बहनें लगातार आ रही है और अपने भाइयों को राखी बांध रही हैं। सभी बहनें अपने भाइयों से अपेक्षा कर रही है कि वे क्राइम का रास्ते में फिर ना जाएं। जिला जेल में वर्तमान में 206 बंदी सजा काट रहे हैं। इसमें 200 पुरुष और 6 महिला बंदी हैं। सभी बहनों से उनके भाइयों को राखी बंधवाई गई। इस दौरान सभी के लिए पानी वगैरह सब चीज की व्यवस्था जेल के अंदर की गई है।