केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने कहा, "आपने देखा है कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है; वही यहां दोहराया जा रहा है, इसीलिए भाजपा सरकार ज़रूरी है। प्रधानमंत्री ने मंच से कहा कि घुसपैठियों को चुन-चुनकर निकालना है, इन सारे समस्याओं की जड़ घुसपैठिए हैं. जम्मू-कश्मीर में पहले पत्थरबाजी होती थी, लेकिन अब वहां वह बंद हो गई है। ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी उन्हीं पत्थरबाजों को यहां ले आई हैं; उनकी मानसिकता यहां आ गई है.इसलिए, अगर बंगाल को बचाना है, तो ममता बनर्जी को जाना होगा।"असम में NRC की प्रक्रिया की गई ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा सके। हालांकि, इसे पूरे देश में लागू करने पर अभी सरकार ने कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है, लेकिन कई मंचों से इसका जिक्र किया गया है।
CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम): यह कानून 2019 में पारित हुआ और 2024 में लागू किया गया। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है, लेकिन इसमें "अवैध घुसपैठियों" (मुस्लिम शरणार्थियों या प्रवासियों) को शामिल नहीं किया गया है।
सीमा पर फेंसिंग (बाड़ लगाना) और तकनीक (स्मार्ट फेंसिंग) का उपयोग बढ़ाना ताकि घुसपैठ को पूरी तरह रोका जा सके।यहाँ बीजेपी ने घुसपैठ को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। प्रधानमंत्री ने मंचों से कई बार कहा है कि राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है।हालिया चुनावों के दौरान भी 'रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ' का मुद्दा केंद्र में रहा, जहाँ प्रधानमंत्री ने मंच से आदिवासियों की जमीन हड़पने के मुद्दे पर घुसपैठियों को निकालने की बात कही।यहाँ नागरिकता का मुद्दा दशकों पुराना है और NRC की प्रक्रिया इसी का हिस्सा थी।
विपक्षी दलों का कहना है कि यह केवल ध्रुवीकरण (Polarization) की राजनीति है और सरकार असल मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान देती है। आलोचकों का तर्क है कि "घुसपैठिया" शब्द का इस्तेमाल अक्सर एक विशेष समुदाय को लक्षित करने के लिए किया जाता है, जिससे समाज में डर का माहौल बनता है।प्रधानमंत्री के "चुन-चुनकर निकालने" वाले बयान का सीधा मतलब अवैध प्रवासियों की पहचान करना, उन्हें सरकारी लाभों से वंचित करना और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजने की मंशा जताना है। यह सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है।