जम्मू कश्मीर में मंगलवार को बारिश ने भारी तबाही मचाई। जम्मू क्षेत्र में नदियों में उफान आ गया। पानी के तेज बहाव में रास्ते में आने वाली हर चीज बह गईं। चट्टानें, पेड़ और पत्थर ढलानों से नीचे गिर पड़े। वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन हुआ। इसमें 8 तीर्थयात्रियों समेत 12 लोगों की जान चली गई। लगातार बारिश के कारण जम्मू में वैष्णो देवी की यात्रा रोक दी गई। कश्मीर घाटी में भी भारी नुकसान हुआ। जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा नेशनल हाईवे बंद कर दिए गए। कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं। पूरे राज्य में लॉकडाउन जैसे हालात बन गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को गंभीर बताया और जिला प्रशासकों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया। इसके साथ ही जम्मू रीजन के सभी सरकारी और निजी स्कूल को 27 अगस्त तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।
रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे भूस्खलन हुआ। इसकी चपेट में आने से कम से 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 21 अन्य घायल हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। अधिकारियों ने बताया कि अर्धकुआरी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल जुटे हुए हैं और कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि भूस्खलन कटरा शहर से पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक 12 किलोमीटर के घुमावदार रास्ते के लगभग आधे रास्ते में हुआ।
दिर तक जाने के दो रास्ते हैं। हिमकोटि मार्ग पर सुबह से ही यात्रा स्थगित कर दी गई थी, लेकिन पुराने रास्ते पर दोपहर 1.30 बजे तक यात्रा जारी रही। जब अधिकारियों ने बारिश के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाते हुए इसे स्थगित करने का फैसला किया। पंजाब के मोहाली की किरण भी उन लोगों में शामिल थीं जो पत्थरों, पेड़ों और चट्टानें गिरने की चपेट में आ गईं। किरण ने कटरा के एक अस्पताल में बताया कि मैं दर्शन करने के बाद पहाड़ी से नीचे आ रही थी, तभी लोग चिल्लाने लगे। मैंने पत्थर गिरते देखे। मैं सुरक्षित जगह पर पहुंची, लेकिन घायल हो गई। घटना में बाल-बाल बची एक लड़की ने कहा कि हमारा पांच लोगों का एक समूह था, जिनमें से तीन घायल हैं। लड़की घटना के बाद से सदमे में है।