देश के बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई मुद्दों पर तनातनी चल रही थी। जम्मू-कश्मीर का मुद्दा बड़ा तो था ही लेकिन कच्छ का रण, जो कि एक बंजर इलाका है, के बंटवारे पर भी विवाद बना हुआ था। 20 मार्च 1965 को पाकिस्तान ने जानबूझकर कच्छ के रण में झड़पें शुरू कर दीं। शुरू में इनमे सिर्फ सीमा सुरक्षा बल ही शामिल थे पर बाद में दोनो देशों की सेना भी युद्ध में शामिल हो गई। 1 जून 1965 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री हैरोल्ड विल्सन ने दोनों पक्षों के बीच लड़ाई रुकवा कर इस मसले को हल करने के लिये एक निष्पक्ष मध्यस्थ न्यायालय की स्थापना कर दी। इस न्यायालय ने कच्छ के रन की करीब 900 वर्ग किलोमीटर जमीन पाकिस्तान को नाम कर दी।