भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऊना विधानसभा क्षेत्र के विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शिमला में पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की प्रतिमा अनावरण के मौके पर प्रियंका गांधी द्वारा हिमाचल प्रदेश में आई आपदा को लेकर केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी को जो भाषण कांग्रेस के नेताओं ने लिख कर दिया, उन्होंने उस भाषण को मंच से पढ़ कर अपना काम खत्म कर दिया। विधायक ने कहा कि प्रियंका गांधी को यह पता होना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश में आई इस आपदा के दौरान साल 2023 से लेकर आज दिन तक केंद्र की मोदी सरकार ने करीब एक लाख परिवारों को पक्के घर दिए हैं। इसके अतिरिक्त नेशनल हाईवे या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये आपदा ग्रस्त सड़कों के मरम्मत के लिए जारी किया। अन्य जितने विभागों को आपदा में नुकसान पहुंचा उन्हें भी केंद्र की मोदी सरकार ने भरपूर बजट उपलब्ध करवाया। हिमाचल प्रदेश में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सात सहयोगी मंत्री लोगों के बीच दुख दर्द बांटने के लिए पहुंचे। इतना ही नहीं देश के जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां से हिमाचल प्रदेश को भरपूर मदद उपलब्ध करवाई गई। जबकि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री तो प्रदेश की जनता को भारी आपदा में छोड़कर प्रियंका गांधी के भाई के पीछे-पीछे बिहार में भागते नजर आए। उन्होंने सवाल किया कि हिमाचल प्रदेश में छुट्टियां बिताने के लिए आने वाली प्रियंका गांधी बताएं कि वह और उनका परिवार आपदा के समय हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ क्यों खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अपना घर बनाकर प्रियंका गांधी ने हिमाचल प्रदेश के लिए क्या सौगात दी, उन्हें यह भी बताना चाहिए। विधायक ने कहा कि हिमाचल कांग्रेस के नेताओं से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक सभी लोग केवल मात्र झूठ बोलने का की महारथ लिए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी अब हिमाचल में आ ही गई है तो उन्हें अपनी सरकार से भी पूछ लेना चाहिए कि जो गारंटियां हिमाचल प्रदेश की जनता को वोट हथियाने के लिए दी गई थी। वह कहां तक पहुंची है। विधायक ने मुख्यमंत्री को भी जमकर लपेटा और कहा कि जिस कांग्रेस को वीरभद्र सिंह अपने खून पसीने से सींचते रहे, उसी कांग्रेस ने उनके निधन के बाद उनकी प्रतिमा लगाने के लिए वीरभद्र के परिवार के आंसू तक निकलवा दिए। लेकिन जब प्रतिमा के अनावरण का समय आया तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मंच से वीरभद्र सिंह का नाम लेने से भी कतराते नजर आए।