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Una: विधायक विवेक शर्मा बोले- भ्रष्टाचार के शीशे के घर में रहने वाले भाजपा नेता दूसरों पर पत्थर न फेंकें

हुई है, उसे प्रदेश की सरकार पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह ऊना में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को ईमानदारी का चोला पहनकर सुक्खू सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने कभी आपदा को अवसर नहीं बनाया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित राहत राशि के बावजूद केंद्र से अपेक्षित सहायता नहीं मिली, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा राहत पैकेज दिया और मकान निर्माण सहायता राशि को बढ़ाकर सात लाख रुपये किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने वेतन में कटौती की और आपदा राहत कोष में निजी योगदान भी दिया। उनके अनुसार वर्तमान सरकार फिजूलखर्ची पर रोक लगाकर विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान दे रही है। विवेक शर्मा ने भाजपा को घोटालों की जननी बताते हुए कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनावी बॉन्ड और अन्य माध्यमों से प्राप्त हजारों करोड़ रुपये की राशि कहां से आई। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान भी भाजपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यालयों के विस्तार पर भारी खर्च किया। विधायक ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार ने पुलिस को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की छूट दी है। उन्होंने दावा किया कि अपराधियों और नशा तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है और हिमाचल को नशामुक्त बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बोझ बढ़ा। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार को पूर्व सरकार के वित्तीय दायित्वों और ब्याज भुगतान के कारण कर्ज लेना पड़ रहा है। सतपाल सिंह सत्ती के आरोपों का जवाब देते हुए विवेक शर्मा ने कहा कि भाजपा नेताओं को केवल बयानबाजी करने के बजाय अपने आरोपों को प्रमाणित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेता निजी बातचीत में मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर अलग रुख अपनाते हैं।

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