प्राचीन परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन से शनिवार दोपहर विभिन्न स्थानों पर देवी-देवताओं के पवित्र छत्रों का मौली बांधने के बाद श्रृंगार किया गया। जबकि उनके मूल स्थान पर आरती के बाद भ्रमण को शुरू किया गया है। ऊना शहर के करीबी डंगोली स्थित सिद्ध बाबा भर्तृहरि महाराज के मंदिर में भी छत्र को जेठी मौली बांधने के बाद उसका श्रृंगार किया गया। रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा तिथि में जेठी मौली बांधने का मुहूर्त सुबह 11:08 बजे के तक रहा। प्राचीन परंपराओं के अनुसार इस भ्रमण में शामिल होने वाले श्रद्धालु वैराग्य प्राप्त करने वाले देवी-देवताओं के अनुसार ही आठ दिन तक जीवन व्यतीत करते हैं।