राष्ट्रीय किसान संगठन के राष्ट्रीय महासचिव देसराज मोदगिल ने बंगाणा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज्य सरकार से मांग की कि गोबिंद सागर झील का पानी कुटलैहड़ क्षेत्र के किसानों के खेतों और घरों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पानी क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की जरूरतों को पूरा कर सकता है और इससे उनकी खेती को नया जीवन मिलेगा। मोदगिल ने कहा कि कुटलैहड़ जैसे अर्ध शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाएं बेहद सीमित हैं। ऐसे में गोबिंद सागर जैसी झील से जल आपूर्ति सुनिश्चित कर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जल संसाधनों का न्यायपूर्ण और व्यावहारिक वितरण किया जाए ताकि प्रत्येक किसान को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने मलकीयत भूमि के मुद्दे पर भी जोर देते हुए कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों की उन निजी भूमियों को जो अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई हैं, एक व्यवस्थित स्थान पर आवंटित करे। ऐसा करने से किसान अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली भूमि में से कुछ हिस्से को सड़क निर्माण के लिए स्वेच्छा से दे सकेंगे। इससे हर गांव, हर घर सड़क से जुड़ जाएगा। यह सपना सरकार का साकार हो सकेगा। मोदगिल ने भाखड़ा विस्थापितों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भाखड़ा डैम निर्माण के चलते अपनी जमीनें गंवा चुके हैं और आज सरकारी भूमि पर वर्षों से बसे हुए हैं, उन्हें सरकार नियमित करे। उन्होंने कहा कि यह लोग दशकों से इन जमीनों पर जीवन यापन कर रहे हैं और इन्हें अब अधिकारिक रूप से मालिकाना हक दिया जाना चाहिए।