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Solan: चूहुवाल शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा, सुनाया परीक्षित को श्रृंगी ऋषि के श्राप का प्रसंग

नालागढ़ के चूहुवाल के शिवमन्दिर में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य अनिल अत्री ने राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनाया और कहा कि एक दिन राजा परीक्षित शिकार खेलते हुए जंगल गए और वहां उन्होंने ऋषि शमीक को ध्यान में लीन देखा। ध्यानमग्न होने के कारण ऋषि ने राजा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। कलयुग के प्रभाव के कारण राजा परीक्षित ने क्रोध में आकर शमीक ऋषि के गले में एक मरा हुआ सांप डाल दिया। जब यह बात ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी ऋषि को पता चली, तो उन्होंने राजा परीक्षित पर बहुत क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नाग उन्हें डस लेगा, जिससे उनकी मृत्यु हो जाएगी। बाद में राजा परीक्षित ने भी अपनी गलती का पश्चाताप किया और उन्हें ऋषि के शिष्य से यह बात पता चलने पर वे विचलित नहीं हुए। श्राप के बाद, राजा परीक्षित ने अपने शेष समय को श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त करने में व्यतीत किया।

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