सोलन जिले के उपायुक्त कार्यालय में पेंशन व जीपीएफ कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के मुख्य सलाहकार शमशेर सिंह ठाकुर ने खुलासा किया कि एजी कार्यालय में 15 मई 2003 को सरकारी नौकरी में लगे एनपीएस कर्मचारियों को जीपीएफ नंबर अलॉट कर दिए। इसको लेकर उन्होंने कई सवाल खड़े किए। एजी इन कर्मचारियों का जीपीएफ काटती रही, लेकिन जब भुगतान किया गया तो राशि ब्याज काटकर दी गई। एक मामले में तो कर्मचारी का 2005 से 2015 तक जीपीएफ काटा गया। हैरानी की बात है उनके जीपीएफ का भुगतान 2022 में किया गया। 2015 में राशि करीब पौने चार लाख बन गई थी लेकिन मिले 3.01 लाख रुपये। उन्होंने कहा कि ऐसा उन सभी कर्मचारियों के साथ हुआ जो 2003 से सरकारी नौकरी में लगे।