सांसद सुरेश कश्यप ने केंद्र सरकार के मनरेगा को विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के नाम से करने के निर्णय को अहम और ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में किया गया यह व्यापक सुधार करीब 20 वर्षों बाद हो रहा है, जिससे योजना को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान ही नरेगा का नाम बदलकर मनरेगा किया गया था, इसलिए नाम परिवर्तन को लेकर अब राजनीति करना उचित नहीं है। विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर सख्ती से लगाम लगेगी। योजना में डिजिटल अटेंडेंस का प्रावधान किया गया है, जिससे मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही कार्यों की वास्तविक स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाएगी। कश्यप ने कहा कि इस योजना में किए जा रहे बदलाव से अब ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों की बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक मजबूती आएगी।