एनजीओ के माध्यम से संचालित की जा रही सरकार की कौशल विकास भत्ता योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकार के पास एनजीओ के माध्यम से कौशल के गुर सीख रहे बच्चों को देने के लिए पैसे ही नहीं है। आलम यह है कि जुलाई 2024 से अनुसूचित जाति वर्ग और जनवरी 2025 से सभी वर्ग के प्रशिक्षुओं की कौशल विकास भत्ता राशि जारी नहीं हुई है। कौशल विकास भत्ता राशि जारी नहीं होने के कारण जहां प्रशिक्षुओं को रोज रोज का किराया देने में परेशानी आ रही हैं, वहीं एनजीओ भी भवन का किराया और प्रशिक्षकों का वेतन नहीं दे पा रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए वीरवार को शहर की विभिन्न एनजीओ का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सिरमौर प्रिंयका वर्मा से मिला और उनको मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सोसायटी फॉर चाइल्ड रिलीफ एंड वोमेन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष प्रकाश बंसल, माता बाला सुंदरी सोसायटी की ओर से सरोज तोमर ने उपायुक्त को बताया कि कौशल विकास भत्ता योजना के अंतर्गत उनके संस्थानों में कई ट्रेड चल रहे हैं। इन ट्रेडों में दूर दराज क्षेत्र के बच्चे अलग-अलग चीजों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार की ओर से इनको प्रति माह हजार रुपये का कौशल विकास भत्ता दिया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकतर बच्चे जरूरतमंद परिवारों से हैं। ऐसे में वह उनसे अपनी ओर से कोई राशि एडवांस नहीं लेते। जब बच्चों को भत्ता राशि मिलती है, वह तब उनकी फीस अदा करते हैं। ऐसे में अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों को जुलाई 2024 और सभी वर्ग के बच्चों को जनवरी 2025 से कौशल विकास भत्ता जारी नहीं हुआ है। रोजगार कार्यालय से कहा जाता है कि बिल ट्रेजरी को भेजे जा चुके हैं, वहां से जवाब मिलता है कि पैसे नहीं हैं।