हिमाचल किसान सभा की जिला स्तरीय बैठक शनिवार को नाहन में आयोजित हुई। बैठक में किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए 10 अगस्त को प्रस्तावित देशव्यापी जेल भरो आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला सिरमौर सहित पूरे प्रदेश में किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे और सरकार का ध्यान किसानों एवं मजदूरों की समस्याओं की ओर आकर्षित करेंगे। हिमाचल किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने किसानों से कई महत्वपूर्ण वादे किए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि किसानों को कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाए, ताकि उन्हें अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते किसान संगठनों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि मनरेगा में किए गए बदलावों का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा। किसान सभा की मांग है कि मनरेगा के तहत वर्ष में कम से कम 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाए, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सके। उन्होंने केंद्र सरकार से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इन सभी मांगों को लेकर 10 अगस्त को देशभर के साथ हिमाचल प्रदेश में भी किसान सभा आंदोलन करेगी। इसके लिए जिला स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने किसानों, खेत मजदूरों और आम लोगों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।