जिला मुख्यालय नाहन में इन दिनों भुने हुए मक्के की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। स्थानीय स्तर पर मक्की की फसल अभी तैयार नहीं हुई है, लेकिन हरियाणा और पंजाब की मंडियों से आने वाले भुट्टे शहर की रेहड़ियों तक पहुंच रहे हैं। बारिश और सुहावने मौसम के बीच भुट्टे की बढ़ती मांग से रेहड़ी संचालकों की आमदनी भी बढ़ रही है। दिल्ली गेट पर भुट्टा बेचने वाले हीरा सिंह ने बताया कि वह मक्की की बोरियां सब्जी मंडी से खरीदकर लाते हैं। एक बोरी में करीब 60 से 70 भुट्टे होते हैं। मंडी से रेहड़ी तक लाने का परिवहन खर्च भी जुड़ जाता है, जिसके बाद आकार के अनुसार भुट्टों की छंटाई कर बिक्री की जाती है। उन्होंने बताया कि फिलहाल एक भुट्टा 20 रुपये में बेचा जा रहा है। अच्छी बिक्री के कारण वह प्रतिदिन दो बोरियां तक बेच लेते हैं। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में गर्मागर्म भुट्टे खाने के शौकीनों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे कारोबार अच्छा चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के मौसम में सड़क किनारे भुना हुआ भुट्टा स्वाद के साथ मौसम का आनंद भी बढ़ा देता है। वहीं रेहड़ी संचालकों के लिए यह मौसमी कारोबार परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण सहारा बना हुआ है।