भारतीय संस्कृति में सत्य, धर्म और न्याय के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम की जयंती शिंगला में धूमधाम से मनाई गई। रामपुर में भगवान परशुराम ने चार ठहरियां स्थापित की थी। इन ठहरियों में हर वर्ष परशुराम की जयंती मनाई जाती है। रविवार को परशुराम जन्मोत्सव पर कनिष्ठ ठहरी शिंगला में चार देवताओं के सानिध्य में हजारों लोगों की उपस्थिति में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। देव आगमन और परशुराम रथ की शोभा यात्रा आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। क्षेत्र के चार आराध्य देवताओं के मिलन के हजारों ग्रामीण गवाह बने। भगवान परशुराम जी की चार ठहरियों में शुमार कनिष्ठ ठहरी देवता साहिब यज्ञेश्वर शिंगला के मंदिर में परिसर में रविवार को परशुराम जन्मोत्सव धूमधाम एवं हर्षोल्लास से आयोजित हुआ। धार्मिक कार्यक्रम का आगाज देवताओं के आगमन, भगवान परशुराम के रथ की झांकी और शोभा यात्रा से धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ हुआ। देवता साहिब मंदिर समिति शिंगला की ओर से मेजबान देवता की उपस्थिति में शोभा यात्रा का मंत्र उच्चारण और विधि विधान से किया गया। परशुराम जयंती मनाने की परंपरा तीन साल पूर्व ज्येष्ठ ठहरी जाहरू नाग मंदिर शनेरी शमया पुरी से शुरू की गई थी। इसके बाद डमयापुरी डंसा और बीते वर्ष लयापुरी लालसा और इस साल शयापुरी शिंगला में भव्य समारोह आयोजित किया जा रहा है। रविवार को देवताओं के साथ साथ चारों ठहरियों के हजारों ग्रामीण इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुए। देव धुनों से समूचे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा। देवताओं का शुभ आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ग्रामीण कतारों में लगे रहे। दिन भर जन्मोत्सव कार्यक्रम चलता रहा। वहीं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाम पर ग्रामीणों ने नाटी भी लगाई। देवताओं के साथ देवलुओं और ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक पर्व में भगवान परशुराम के जयकारे लगाए। नोग घोड़ी चार ठहरी देव समिति के प्रधान बहादुर लाल शर्मा ने बताया कि हर साल चारों ठहरियों में भगवान परशुराम जयंती मनाने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। इस बार यह कार्यक्रम शिंगला में आयोजित हुआ। परंपरा को निभाने के लिए देव समितियों और समस्त नोग घोड़ी के लोगों का अपेक्षित सहयोग मिल रहा है। इस अनुष्ठान में स्थानीय क्षेत्रों के अलावा बाहरी क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। इस देव मिलन के दौरान ग्रामीण आराध्य देवताओं से सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।